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हिंदी साहित्य वैकल्पिक विषय

 हिंदी साहित्य प्रश्नपत्र एक खंड "क"

हिंदी साहित्य प्रश्नपत्र एक खंड "ख"

हिंदी साहित्य प्रश्नपत्र दो खंड "क"

हिंदी साहित्य प्रश्नपत्र दो खंड "ख"

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1.2 मानक हिंदी की व्याकरणिक संरचना

  किसी भाषा में निहित व्यवस्था उसके व्याकरण पर निर्भर होती है। व्याकरण का अध्ययन चार भागों में बाँटकर किया जा सकता है :- 1. पद संरचना 2. कारक व्यवस्था 3. विकारोत्पादक तत्व 4. वाक्य संरचना   हम क्रमशः इन चारों भागों का अध्ययन करेंगे।   हिंदी की पद संरचना :-       पद संरचना पर आरंभिक चर्चा शब्द संपदा के अंतर्गत की जा चुकी है। शब्द और पद प्रायः समानार्थक शब्द हैं। इनमें अंतर सिर्फ यह है कि व्याकरण की व्यवस्था से युक्त होने के बाद शब्द पद कहलाते हैं।      पहले बताया जा चुका है कि हिंदी के पद दो प्रकार के हैं- विकारी तथा अविकारी। विकारी पदों में संज्ञा , सर्वनाम , विशेषण तथा क्रिया शामिल हैं जबकि अविकारी पदों में क्रियाविशेषण , योजक या समुच्चयबोधक , संबंधबोधक तथा विस्मयादिबोधक पद शामिल हैं। अविकारी पदों के संबंध में जो चर्चा पहले हो चुकी है , वह पर्याप्त है। विकारी पदों के संबंध में यहाँ विस्तृत/चर्चा की जा रही है।   हिंदी की संज्ञा व्यवस्था :- परिचय      संज्ञा वह पद है जो किसी व्यक्ति , वस्तु. विचार भाव , द्रव्य , समूह या जाति के नाम की व्यक्ति करता है। वाक्य

1.1 हिंदी भाषा का परिचय

किसी भी भाषा का अध्ययन चार इकाइयों के स्तर पर किया जा सकता है - 1. ध्वनि व्यवस्था 2. शब्द व्यवस्था 3. व्याकरणिक संरचना 4. लिपि व वर्तनी   हिंदी भाषा की ध्वनि व्यवस्था :-     हिंदी भाषा में कुल 59 ध्वनियाँ स्वीकार की गई हैं इस दृष्टि से हिंदी दुनिया की सर्वाधिक समृद्ध भाषाओं में से एक है। विश्व को सभी भाषाओं में प्रचलित प्रायः सभी ध्वनियाँ इसमें विद्यमान हैं। इन ध्वनियों को मूल रूप से तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है :-   (क) स्वर   (ख) व्यंजन   (ग) अयोगवाह ध्वनियाँ   (क) स्वर :-       स्वर उस ध्वनि को कहते हैं जिसका उच्चारण बिना किसी अन्य ध्वनि को सहायता के होता है। हिंदी भाषा में बारह स्वर हैं जिन्हें तीन वर्गों में विभाजित, किया जा सकता है :- (अ) मूल स्वर अर्थात् वे स्वर जिनका कोई विभाजन नहीं हो सकता। ये संख्या में चार हैं- अ, इ. उ, ऋ। (आ) दीर्घ स्वर अर्थात् एक ही मूल स्वर के दो बार जुड़ने से बनने वाले स्वर। ये भी संख्या में चार हैं।–      आ (अ + अ)      ई (इ + इ)      ऊ ( उ + उ )      ऋ (ऋ + ऋ)   (इ) संयुक्त स्वर अर्थात् वे दीर्घ स्वर जो दो अ